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कहीं चली...

कहीं चली जाऊ मैं जहां हो शांति, खुशी और प्यार हो कहीं चली जाऊ लोगों से दूर, जहां प्रकृति में शांति से रह सकूँ यहाँ नफ़रत, इर्षीय, गुस्सा से ज्यादा अच्छा हैं कहीं चली जाऊ, जहां कोई ढूंढ ना पाये मुझे जहां हो सिर्फ हरियाली ओर हरियाली जहां हो शांति, खुशी ओर प्यार।

By Ashfia Parvin
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