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खाने को कुछ नहीं...
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खाने को कुछ...
“
खाने को कुछ नहीं तो ग़म खा रहे हैं कभी इश्क़ का दरिया हमारे भी घर से गुज़रता था। Anoopama Ved
”
By
Anoopama Tripathi
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