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कदम कदम...

“ कदम कदम पर तेरे न होने के एहसास ने जिन्दा रखा एक आश जो थी के तुम मिल जाओगे फिर से किसी कच्ची-पक्की सड़क किनारे धुप सेंकते, कभी कोई एक माघ में । ”

By Adyasha Das
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