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कभी झुलसती...

कभी झुलसती गर्मी के थपेड़े कभी सर्द हवाओं के झोंके तो कभी बारिश के फुहारें कभी वसंत की खुबसूरती बदल रहा मौसम पल-पल इंसान भी बदलता अपनी फितरत कभी अच्छा तो कभी बुरा बदला मौसम बदला इंसान।

By Rekha Maity
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