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कान्हा!...

कान्हा! मेरे सारे कर्म अब तुझ तक ही तो सिम्मित हैं, तुझसे मिली हर शीख ने मुझे जगत के कर्मो से रुबरू जो करवाया हैं।

By Khushi Kumari
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