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ज़ख्म तो...

ज़ख्म तो बहुत मिले ज़िन्दगी में पर मरहम नहीं, कहने को सब अपने, पर कोई मेरा हमदम नहीं, रिश्तो का धनी हूं मैं,बस इसी भ्रम में जी रहा था, अपनों ने जो दिए ग़म, वो भी था कुछ कम नहीं। मिली साहा

By मिली साहा
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