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जिंदगी कुछ बाकी...
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जिंदगी कुछ...
“
जिंदगी कुछ बाकी थी उनके बिना,शायद ब्याज ज्यादा था प्रेम की उधारी पर
”
By
Neeraj Saraswat
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निखालस प्रेम
विरह
अकेलापन
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Neeraj Saraswat
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