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जिन्दगी के...
“
जिन्दगी के रास्ते हमने सिर्फ सोचा था लेकिन चलते आए आज तक किसी और राह पे । मंजिल की बस तलाश थी रास्तों से फरक नही पड रहा था ।क्योंकि साथ हम सब्र जो लेकर चल रहे थे । - bhayodisha
”
By
Bhagyashree Subedar
32
bhayodisha
सब्र
मंजिल
#रस्ते
जिन्दगी
साथ मंजिल के
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Bhagyashree Subedar
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