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झूठ के बाज़ार में...
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झूठ के...
“
झूठ के बाज़ार में फरेब को होते देखा है ना चाहते हुए भी अपनों को आपस में झगड़ते देखा है दिल के ख्व़ाबो को तडपते-टूटते देखा है पैसो के बाज़ार में रिश्तों को बिकते देखा है ए जिन्दगी!मुझे ऐसा ना बना देना शोहरत देकर जज्बतॉ को ना मिटा देना। ~卐A
”
By
Swastika Jain
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Swastika Jain
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