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इश्क इन...

इश्क इन फिजाओं में है, इश्क इन हवाओं में है इश्क वतन की मिट्टी में, इश्क है तुमसे भी प्रिए, तेरे लिए हर गम सह जाऊंगा किंतु वतन के लिए खाक भी हो जाऊंगा

By राजेश "बनारसी बाबू"
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