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इश्क भी न...

इश्क भी न जाने कैसा समन्दर हो गया उतारी थी जिन्होंने अपनी कश्ती दरिया समझकर उनकी तो ये हस्ती भी ख़ुद ही में समो गया इश्क भी न जाने कैसा समन्दर हो गया।

By Jyoti Agnihotri
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