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इंसान लालच...

“ इंसान लालच में खोता जा रहा है क़ुदरत के लिए दोगला होता जा रहा है सच कहूँ तो दुनिया में ही है सुकून दुनियादारी में तू बस रोता जा रहा है। ”

By Fardeen Ahmad
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