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इक आशा का करम...
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इक आशा का...
“
इक आशा का करम रहने दे, मेरी आँखों में शरम रहने दे, शायद बढ़ जाये दिन जीने के, अपने होने का भरम रहने दे || प्रभात
”
By
प्रभात मिश्र
306
आशा
भ्रमित
जुदाहोकरमिलनेकावादाकरो/इकरारआनेकाज्यादाकरो.मुहब्बतमेंजीनेकायेहीचलनहै/बनोश्याममेरानामराधाधरो
आणिनितीमत्ताजिवनाचेहेत्रीसुत्रअंगिकारूनचालतराहणे.हाचजीवनप्रवासहोय.🌸अस्मिताप्रशांतपुष्पांजलि🌸भंडारा
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प्रभात मिश्र
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