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हर डोर से...

“ हर डोर से मजबूत है, जो डोर है विवाह की नहीं तोड़ने की सोचना, यह शपथ है निर्वाह की समय संग बढ़ती निरन्तर, गहराई इसमें चाह की दु:खों की धूप जो मिटा दे, वह छाँव है यह राह की ”

By Dr. Nidhi Priya
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