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हर बात की...

हर बात की माफ़ी नहीं होती दिल एक बार खा जाए जो धोखा फिर माफी की गुंजाइश नहीं होती तुम लाख मना लो इस दिल को टूट कर बिखरा जो काँच सरीखा जोड़ें से भी वो पहले जैसे नहीं होती !!

By Rashmi Prakash
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