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हो गई...

“ हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए आज यह दीवार परदों की तरह हिलने लगी शर्त ये थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर में, हर गांव में हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए मेरे सीने मे https://gurukul99.com/motivational-poems-in-hindi ”

By Rohit Vyas
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