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हमने वफाएं...

हमने वफाएं की है किसी नफा के उम्मीदों पर नहीं तुमने ज़तिया की है और हम उफ़ तक ना करे तुम्हारे पैसों से हमारा घर बस्ता जरूर है पर भूलना नहीं हमारे खून से तुम्हारे भी घर रौशन होते है हम मजदूर है साहब गरीबी का रोना नहीं हमारे हक की रोटियां तोड़ते है

By Antariksha Saha
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