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...हमारा...

“ ...हमारा समाज... बेजुबान पत्थर पे लदे रहते हैं करोडो के गहने मंदिरो में, उसी दहलीज पे एक रूपये को तरसते नन्हे हाथ भी रहेते हैं।। ”

By आशिषकुमार दुबे
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