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गरीब को कहाँ...
गरीब को कहाँ...
गरीब को...
“
गरीब को कहाँ किसी अम्रत
रस की तमन्ना होती है यारो
वो तो सुख की शक्कर और
दुख की दही से बनने वाली
जीवन की खट्टी मीठी लस्सी
पीकर ही मगन रहता है
”
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