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एक किताब...

“ एक किताब के अंदर कुछ रेखांकित की गयी पंक्तियों की तरह... जब भी खुलता है मेरे मन का कोई पन्ना मेरा ध्यान बरबस तुम्हारी ओर चला जाता है... प्रभात ”

By प्रभात मिश्र
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