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दिन ढ़ल जाता रोज...
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दिन ढ़ल जाता...
“
दिन ढ़ल जाता रोज यूँ ही जिंदगी है अनमोल यूँ ही कर्तव्य पथ अब निहार रहा है मुझे प्यार से पुकार रहा है । (विनय अन्थवाल)
”
By
Vinay Anthwal
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Vinay Anthwal
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