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दिल के ज़ख़्म...
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दिल के...
“
दिल के ज़ख़्म इतने हो गए नासूर कि अब आंसू भी नहीं आते हैं, जिंदगी ऐसे मोड़ पर ले आई है कि अपने भी बेगाने से लगते हैं।। मिली साहा
”
By
मिली साहा
344
ज़ख्म
नासूर
तनहासीजिंदगीमेंलोगभीबेगानेसेलगतेहैंअपनेपरायेकीपहचानमेंसभीअनजानेसेलगतेहैं
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