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चुप रहकर...

चुप रहकर सूना चीख़ जंजीरों में जकड़े देखा मैंने आज़ाद मस्त परिंदे को आख़िर कैसे आज़माइश होती इस जहन में ,कि मार दिया जाता इंसान इस झूठे संसार में। @ज़ेबा परवीन

By ZEBA PARVEEN
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