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छोड़िए...

छोड़िए अल्फाज वो मेरी जुबान तक ले गया देकर अपनी याद मेरी आंखों में आंसू छोड़ गया कहकर अपने प्यार की निशानी मुझे पेट से कर गया घुट घुट के रोती रही सामने उसके और वो इसे अनजाना सा गलती कह गया विवाह का प्रस्ताव करती मै रोती रही वो हमे रोता छोड़ किसी और का हो गया

By राजेश "बनारसी बाबू"
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