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**बनारस*...

**बनारस* तू गंगा की लहरें, मैं घाट का किनारा हूँ, , तू मंदिर की प्रार्थना, मैं मस्जिद का अजान हूँ, तू दशाश्वमेध घाट की अलौकिक आरती, मैं गंगा उस पार की सुनहरी शाम हूँ, राज सिंह

By राजेश "बनारसी बाबू"
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