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भूल गए चाहने...
भूल गए चाहने...
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भूल गए...
“
भूल गए चाहने वाले पलटकर न देखा एक बार आखिर वफ़ा की ये कैसी सजा सुनाई।। मिली साहा
”
By
मिली साहा
229
वफ़ा
सजा
इश्क
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मिली साहा
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