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भरे बज़्म में ...
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भरे बज़्म ...
“
भरे बज़्म में आंसू का चंद कतरा जो मैं चाह कर भी ना रोक पाया जिनके लिए लिखा था शे'र हमने वही अल्फाज़ दरिया बन कर डुबाया
”
By
प्रेमयाद कुमार नवीन
66
बज़्म में खुशी बाँटते
आँसू
चाहेकष्टअपार।हरसंकटमेंसाथहो
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from
प्रेमयाद कुमार नवीन
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