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भरे बज़्म ...

भरे बज़्म में आंसू का चंद कतरा जो मैं चाह कर भी ना रोक पाया जिनके लिए लिखा था शे'र हमने वही अल्फाज़ दरिया बन कर डुबाया

By प्रेमयाद कुमार नवीन
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