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बहोत देर से...
“
बहोत देर से समज़ आया मुजे की बेकार ही उल्ज़नो मे उलझा रहा मैं गोल दुनिया को कहा किस किनारे लगाने चला मैं।
”
By
Devanshu Ruparelia
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किताबीदुनिया
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किनारा
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