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बहक सी गई...

बहक सी गई है कलम तुम्हे देख कर मिरे ख़्यालों में फिर सब रूबरू होकर इश्क़ फ़िजा सब्ज़-बाग़ याद कर बैठे कुछ उन्हें पाकर और कुछ तो खोकर

By प्रेमयाद कुमार नवीन
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