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बहक सी...
बहक सी गई है कलम...
बहक सी गई...
“
बहक सी गई है कलम तुम्हे देख कर
मिरे ख़्यालों में फिर सब रूबरू होकर
इश्क़ फ़िजा सब्ज़-बाग़ याद कर बैठे
कुछ उन्हें पाकर और कुछ तो खोकर
”
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