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अपनों के बीच...
अपनों के बीच...
अपनों के...
“
अपनों के बीच सच्चे रिश्तें तलाशती रहती हूं
बंद दरवाजों की कुंडी खड़काती रहती हूं
हंसते मुस्कराते चेहरों के बीच
खुद के लिए मुस्कुराहट ढूंढती रहती हूं
ना कोई मिला, ना मिलेगा
यह जानते हुए भी उम्मीद का दीया जलाए बैठी हूं।।
©अनामिका अनूप
”
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