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आंखो में...

आंखो में बनकर ख़्वाब उतर रातों में बन महताब उतर तू स्वेत समंदर प्यास है मेरे सपनों की आश है तू जख्मों पे मलहम की तरह तू तुम होकर है हम की तरह तू मेरी चांदनी रात है मेरी एक गहरी बात है मैं तुझमें तेरा हो गया गई रात सबेरा हो गया मुझको तू लेकर साथ चल हाथों में ले अब हाथ चल

By Sujeet Singh
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