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आज तुम से...

आज तुम से बात कर के ऐसा लगा कि तुम मेरे जीवन का ऐसा झूठ हो ,जिसे मैं सच बनाने कि नाकाम कोशिशों में लगी हूं। (मानों पतझड़ के मौसम को , बसंत बनाने में हूं , हां मैं प्रेम में हारा एक बेबस प्रेमी हूं।)

By Harshita Mishra
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