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आज़ तक उस...
“
आज़ तक उस मोड़ पर मिलते निशां जो इश्क़ के दो दिल ज़हां पर मिल रहें थें और पौधें पेड़ पत्ते भी गवां है जिस जगह हम तुम जुदा फिर हो गएं थें... अनिकेत सागर
”
By
कवी अनिकेत मशिदकर
287
निशां
पेड़
पौधें
प्यार
इश्क़
दिल
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hindi quote
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कवी अनिकेत मशिदकर
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