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Hilal Saeed

Romance Fantasy Thriller


4.5  

Hilal Saeed

Romance Fantasy Thriller


सुरूर ए इश्क़

सुरूर ए इश्क़

1 min 289 1 min 289

मुहब्बत हो रही है

में ख़ामोश हो रहा हूं

अपने ही हातो से कुछ 

इस तरह खुशियां खों रहा हूं।


मुहब्बत का फितूर ख़तम हुआ

सुरूर ए इश्क़ जारी है

इसने बेशक चुना है मुझे

शायद अब मेरी बारी है।


महफिलों में अब यह दिल लगाऊ केसे

अब साथ

यह अजियत नाक तन्हाई हैं

मौत भी मांगो नहीं मिलती

सेहम कर इस क़दर तेरे इस इश्क़ से 

तुझे ख्वाबों में भी ला हसिल छोड़ने की ठानी है।


जीना इसको भी कहते है। 

कोई एसे भी जी जाता है

मौत मांगना गुनाह है यहां शायद

के आरजी सा वो ताल्लुक़

आज भी

मेरी रूह को हर पल सहमाता है।


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