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Hilal Saeed

Romance


5.0  

Hilal Saeed

Romance


मेरा दिल

मेरा दिल

1 min 169 1 min 169

ना जाने क्यों उसका ज़िक्र मेरे हर लम्हे में ले आता है

क्यों आज भी ज़िक्र ए मुहब्बत करके बहल जाता है

मेरा दिल


ना जाने क्यों खामोशियों में मेरी उसका एहसास

कराता है

क्यों मेरी हर खामोशी को एहसास ए मुहब्बत में

तब्दील करता है मेरा दिल


क्यों उसके हर खयाल पर मुझसे खामखां लड़

जाता है मेरा दिल

क्यों उसका खयाल खामोश रातों में अपने किसी

कोने से निकाल लाता है


खो दिया है मैने उसको यह एहसास मुझे करता है

कभी शब वो सहर उसके करीब होने का गुमान

मुझे यह करता है


आज खोकर भी उसको हर लम्हे में यह पाता है

मेरा दिल

ना जाने मुझसे क्या चाहता है ना अपनी ये ख्वाहिशें

यह बताता है


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