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मौसम है...

मौसम है बरसात का, बूँदों की बारात। ढोल बजाने आ गए, बादल बिजली साथ। बादल बिजली साथ, हो गई पुलकित धरती ओढ़ चुनरिया सब्ज़, दिख रही जलकण भरती। बिखरे रंग अपार, हुआ खुशियों का संगम मन को भाया खूब, रूप बरसाती-मौसम। -कल्पना रामानी

By कल्पना रामानी
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