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बहु भाषाएँ...

बहु भाषाएँ सीखिये, पर हिन्दी हो खास। हिन्दी से ही बंधुओं, बढ़े आत्मविश्वास। बढ़े आत्मविश्वास, महक इसमें है देशी क्यों प्रसन्न हैं आप? चूमकर भाव विदेशी। कहनी इतनी बात, देश की शान बढ़ाएँ हिन्दी के ही बाद, सीखिये बहु भाषाएँ। - कल्पना रामानी

By कल्पना रामानी
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