STORYMIRROR

जो न जाना...

जो न जाना है अभी तक मैं उसे पढ़ने चली हूँ। मैं विजय का लक्ष्य लेकर गिरि-शिखर चढ़ने चली हूँ।। भाव जो भी हीनता के नष्ट सारे हो सकेंगे, गर्व की अनुभूति वाली मूर्ति नव गढ़ने चली हूँ।।

By Anuja Manu
 279


More english quote from Anuja Manu
14 Likes   0 Comments