Abdul Rahman Bandvi
Literary Colonel
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बाँदा जिले के नाम पर ही ये रहमान बाँदवी हैं कहलाए , वालिदैन के साए से बुज़ुर्गो का एहतराम बख़ूबी है सीख पाए। हैं ये यांत्रिक अभियंता, पेशे से हैं सहायक परियोजना अभियंता, लेखन एक शौक है इसीलिए शौक से लेखक/कवि भी बनता। उद्देश्य जो रखते हैं वो है आपस में सभी का इत्तिहाद कराना, ख़्वाहिश है सभी के... Read more

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हो अगर दिल में प्यार तो विश्वास होना ज़रूरी है

इश्क़ का रोग हमें कुछ इस कदर लग गया, उसकी यादों में हर वक्त खोता चला गया। सब कहते हैं न जाने इसको क्या हो गया? बहन कहती न जाने किस चुड़ैल के चक्कर में निकम्मा हो गया।। 😃😃

आलस मनुष्य का शत्रु कहलाता है बड़ा करता रहता हर वक्त बहाने वो पड़ा-पड़ा इसीलिए वो काम नहीं कर पाता बड़ा-बड़ा कर परिश्रम दिल से फिर कहलाएगा इंसान बड़ा

जब कोई इंसा जहां में मशहूर होने लगता है, तब उस पर इल्ज़ाम का अंबार लगने लगता है।

जब कोई इंसा जहां में मशहूर होने लगता है, तब उस पर इल्ज़ाम का अंबार लगने लगता है।

जब कोई इंसा जहां में मशहूर होने लगता है, तब उस पर इल्ज़ाम का अंबार लगने लगता है।

जिसे देखो उसको सिर्फ़ एक ही ख़याल है, वो पहले जैसा नहीं रहा इसका मलाल है। पर क्या आपने अपने अंदर झांक कर देखा, "रहमान बांदवी" आपका भी उन्हीं के जैसा हाल है। 

तेरा इस तरह बेरुखी से मिलना अच्छा नहीं लगता, हंसी चेहरे पर ये उदासी देखना अच्छा नहीं लगता।

तेरा इस तरह बेरुखी से मिलना अच्छा नहीं लगता, हँसी चेहरे पर ये उदासी देखना अच्छा नहीं लगता।


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