जगन्नाथ "पृथक"

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"नमस्कार, मैं एक स्वतंत्र लेखक और कवि हूँ। शब्दों के माध्यम से समाज के सच, मानवीय भावनाओं और अपने अंतर्मन के विचारों को पन्नों पर उतारना मुझे पसंद है। आशा करता हूं कि मेरी रचनाएँ आपके दिलों को छू सकेंगी।" ‌‌ धन्यवाद

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गुरू में ब्रम्हा, गुरू में विष्णु, गुरू में भोले, हैं भगवान्, गुरू है माता, गुरू पिता सा, गुरू मान, गुरू सम्मान, गुरू दिखाये, राह हमेशा, अच्छी सोच विचार की, गुरू सत्य है, गुरू है पूजा, गुरू ज्ञान की खान है, मेरे गुरूवर को भी मेरा, हाथ जोड़ प्रणाम है, मेरे गुरूवर को तो मेरा, हाथ जोड़ प्रणाम है। जगन्नाथ "पृथक"

दवा 💊हो या फिर🧍मनुष्य, एक्सपायर होने पर, घर से, बाहर कर दिए जाते हैं।

कुछ परिस्थितियों में कभी-कभी अपने आत्मसम्मान को रिस्तों से सर्वोपरि रखना चाहिए। जगन्नाथ "पृथक"


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