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भाऊराव महंत
Literary Colonel

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नाम - भाऊराव महंत पिता - श्री परदेशीलाल महंत माता - श्रीमती दुर्गा महंत पत्नी - श्रीमती कौशल्या महंत जन्मतिथि - 08 नवंबर 1984 शिक्षा - एम.ए.(हिंदी, संस्कृत), बी.एड. सम्प्रति - उच्च माध्यमिक शिक्षक मध्यप्रदेश शासन, सचिव, मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन इकाई बालाघाट पता - ग्राम बटरमारा, पोस्ट... Read more

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Submitted on 10 Mar, 2020 at 09:26 AM

रंग """ उनके हाथों में रंग था। हाथ भी थे रंगे हुए। वे औरों को ही रंगते जा रहे थे, अपने रंगे हुए हाथों से। पर किसी की क्या मज़ाल, कि उनको भी रंग सके? जिनके हाथों में रंग था। हाथ भी थे रंगे हुए। भाऊराव महंत

Submitted on 15 Dec, 2019 at 08:34 AM

संगीत में वह शक्ति होती है, जो मन को आंदोलित कर दृढ़ता प्रदान करती है। भाऊराव महंत

Submitted on 13 Dec, 2019 at 06:30 AM

स्वप्न साकार करने के लिए परिश्रम अत्यावश्यक तत्व भाऊराव महंत

Submitted on 11 Dec, 2019 at 13:16 PM

सत्य को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। .......................................भाऊराव महंत

Submitted on 11 Dec, 2019 at 13:13 PM

सत्य बिकाऊ नहीं होता भाऊराव महंत

Submitted on 11 Dec, 2019 at 13:11 PM

निरन्तर गतिशील रहना ही कर्म है और लक्ष्य को प्राप्त करना उसका फल इसीलिए कर्मफल यानी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें हमेशा कर्म अर्थात गतिशील रहना पड़ेगा। भाऊराव महंत

Submitted on 09 Dec, 2019 at 06:29 AM

जीवन और मृत्यु दोनों अकाट्य सत्य है, और जीवन संघर्ष है तो मृत्यु उस संघर्ष का अंत। भाऊराव महंत

Submitted on 08 Dec, 2019 at 06:58 AM

जीवन को बेहतर से बेहतर बनाने के लिए संघर्ष का होना बेहद जरूरी है। अन्यथा जीवन नर्क से कम नहीं। भाऊराव महंत

Submitted on 08 Dec, 2019 at 06:53 AM

संघर्ष ख़त्म जीवन समाप्त भाऊराव महंत

Submitted on 08 Dec, 2019 at 06:51 AM

जीवन संघर्ष है। अतः जो जैसा संघर्ष करेगा, उसका जीवन भी वैसा ही होगा। भाऊराव महंत

Submitted on 07 Dec, 2019 at 09:11 AM

जबसे मुश्किल काम आया। ईश्वर तेरा नाम आया। तूने औषधि दुःख की दी- जीवन को आराम आया।। भाऊराव महंत

Submitted on 07 Dec, 2019 at 08:51 AM

हे खुदा आज मै करता हूँ तेरी 'बंदगी' मत दे मुझको ऐसी उधार की जिंदगी कर्ज के तले सबके बोझ मे दबा हूँ मैं नहीं चाहिए खुदा मुझको ऐसी गंदगी भाऊराव महंत

Submitted on 07 Dec, 2019 at 08:50 AM

हे खुदा आज मै करता हूँ तेरी 'बंदगी' मत दे मुझको ऐसी उधार की जिंदगी कर्ज के तले सबके बोझ मे दबा हूँ मैं नहीं चाहिए खुदा मुझको ऐसी गंदगी भाऊराव महंत

Submitted on 06 Dec, 2019 at 12:07 PM

जिसने थोड़ा भी देश हित में काम किया है, वह मेरे लिए राष्ट्र नायक से कम नहीं.......! भाऊराव महन्त

Submitted on 06 Dec, 2019 at 12:02 PM

पूजा की इक थाल सजाई जाती है। पान-फूल, सिंदूर चढ़ाई जाती है। रोली चंदन माथ लगाकर के 'भाऊ'- ईश्वर से उम्मीद लगाई जाती है।। भाऊराव महंत

Submitted on 05 Dec, 2019 at 13:55 PM

कर रहे हैं इंतजार बेसबब हो गया हमें भी प्यार बेसबब। जिंदगी तो जिंदगी रही नहीं जिंदगी दे दो उधार बेसबब।। भाऊराव महंत

Submitted on 05 Dec, 2019 at 13:52 PM

उन दोस्तों से दोस्ती बिल्कुल अच्छी नहीं, जो आपके व्यवहार को समझे नहीं।

Submitted on 03 Dec, 2019 at 08:46 AM

शिक्षक की गुणवत्ता परखने वाला शिष्य कभी भी ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता। -भाऊराव महंत

Submitted on 03 Dec, 2019 at 08:45 AM

शिक्षक की गुणवत्ता परखने वाला शिष्य कभी भी ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता। -भाऊराव महंत

Submitted on 02 Dec, 2019 at 11:44 AM

ज़िन्दगी की असल ख़ुशी परिवार के साथ रहने में है।


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