कल्पनाओं से परे.. यथार्थ के कठोर धरातल पर.. लिखने की एक छोटा सा प्रयास..✍️जय श्री कृष्ण 🙏
Share with friends
अगर कभी अपने कांटों की तरह चुभने लगे तो भी उनके साथ रहिए क्योंकि, कांटों से बिछड़ कर गुलाब का भी कोई अस्तित्व नहीं रहता..!!
इस स्वार्थ भरी दुनिया में लोगों के ईमान पर धूल बहुत है दोस्तों, बादल बनकर अंतरिक्ष से बरस जाने को जी चाहता है,