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प्रेम की सारी निलम्बित कविताएँ एक मौन प्रार्थना हैं। प्रेम की सारी निलम्बित कविताएँ एक मौन प्रार्थना हैं।
धूप की बारिश जहाँ होती है थोड़ी शिकायतें और थोड़ी सिफ़ारिशें। धूप की बारिश जहाँ होती है थोड़ी शिकायतें और थोड़ी सिफ़ारिशें।
मधुर और मंद है प्रेम तुम्हारा निर्झर जल की धार हो तुम। मधुर और मंद है प्रेम तुम्हारा निर्झर जल की धार हो तुम।
सुप्ति में ढूँढते हम विजय पथ महान हैं, वो चेतन मन का सुरभित वितान है। सुप्ति में ढूँढते हम विजय पथ महान हैं, वो चेतन मन का सुरभित वितान है।