akash bansirar
Literary Lieutenant
6
പോസ്റ്റ്സ്
21
ഫോളോവെർസ്
0
ഫോളോവിങ്

I'm akash and I love to read StoryMirror contents.

കൂട്ടുകാരുമായി പങ്കുവെക്കുക
Earned badges
See all

तुम्हारी रूह तक मेरी पहचान है, कितना छुपाओगे खुद को ? आंखों में जो भरें आंसु है, कितना रोक पाओगे उनको ? अब जो टूटे हो तो बिखर जाओ मेरे बाहों में कितना सम्भाल पाओगे खुद को ? आखिर कितना दूर करोगे खुद को ?

थक चुका हूं, खुद से झूठ बोलते बोलते। थक चुका हूं, खुद को समझाते समझाते। प्यार हो तुम मेरा, थक चुका हूं, तुझसे से नफ़रत जताते जताते।।

वक़्त तो दिजिए ज़नाब, ये उसूल भी टूटेंगे आप खरीदिए तो, यहां ईमान तक बिकेंगे ये दुनिया बाजार है ज़नाब, यहां लोग तक बिकेंगे।


ഫീഡ്

ലൈബ്രറി

എഴുതുക

അറിയിപ്പ്
പ്രൊഫൈൽ