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हम जीतने छोटे होते हैं रोते वक़्त उतना ही आवाज ज्यादा और आँसू कम..... पर जैसे-जैसे बड़े होते जाते हैं ये उतना ही उल्टा होता जाता है। नीरू
हाथों से निकल रहा तू रेत की तरह रहा साथ सूरज की तरह चमका चंदा की तरह बीत रहा तू लाखो यादों के साथ दे जा रहा साथ नए साल का नीरू