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जब भी अलविदा हो इस जहाँ से मेरा, दास्तान-ए-शहर हो की ऐसे जीते हैं ज़िंदगी...! जब भी अलविदा हो इस जहाँ से मेरा, दास्तान-ए-शहर हो की ऐसे जीते हैं ज़िंदगी...!