I am a motivational speaker/trainer. Poetry is my hobby.
Share with friends
कभी बांहों में कभी आगोश में थे, समाए थे आपस में ना होश में थे। करेंगे मुकम्मल मुहब्बत अपनी, अपनी जवानी के जोश में थे। होश आया तो मेहसूस हुआ, इक झूठे ख्वाब के आगोश में थे।