जहां तस्वीर बदलती है,वहां कलम लिखती है। जहाँ अन्याय होता है, वहाँ विधि बोलती है।
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आज आदमी मतलब ए फरेब जैसा है, उल्फतों से जिसकी नियत में खोंट पैदा है, वो आदमी सजदा कर नहीं सकता कभी, जिसका साथ मतलब ए फरेब जैसा है। बाबा