An aspiring writer poet and satirist
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तू बन हर दीए की बाती, जल रौशन करता चला चल तू पी जा घुप्प अंधेरे को, जो है वर्षों से तम हलाहल... बन सूर्य किरण की तेज ताप, धरती की विस्मय खुशहाली हर पल हर दिन हर वर्ष तू बन, हर आग्रही की "शुभ दीपावली"...✍️🕉️
जिसको जाना है, वो अभी चला जाए जिन्दगी से... स्वच्छ भारत के दौर में, हमें भी तो छुटकारा मिले गन्दगी से...✍️😉