शिष्टतारहित / विवेकविहीन समाज / सम्बन्ध! ..एक "विकृत दुनिया का निर्माण का कारण बनते हैं भले ही उनकी आभासी दुनिया इसे तरक्की समझती हो !" - ज़हीरुद्दीन साहिल
तालीम/ किताबें ..अगर आपका दिल /दिमाग रौशन न कर सकें..तो निश्चित ही आप अनपढ़ हैं..और ये अनपढ़ता,आपके व्यवहार में साफ दिखती है । - ज़हीरुद्दीन साहिल
" सुख-दुःख सांझा करने के वो ज़माने चले गए ! बदी को नकारते, नेकी के वो ज़माने चले गए बालों में जब मुस्कुराते थे फूल खुशबूदार फितरतों के वो ज़माने चले गए !! - ज़हीरुद्दीन साहिल
"आज फिर निकली हैं हल्का सा सेंक लिए सूरज की किरणें....आज फिर मेरा ख़ुदा🌹मुझ पर मेहरबान है !!" - ज़हीरुद्दीन साहिल
" हर उस लम्हे को जाने दो..जो तुम्हें तुम्हारी मन्ज़िल से भटका दे भले ही वो कितना ही कीमती क्यों न हो ! " - ज़हीरुद्दीन साहिल